दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
पत्रिका के बारे में
दीया बाती पत्रिका : गाँव, समाज आ संस्कृति के उजाला
भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका.
दीया बाती पत्रिका एगो अइसन प्रयास ह, जवन भोजपुरिया माटी के खुशबू, गाँव के सादगी आ समाज के सच्चाई के शब्दन में पिरो के पाठकन तक ले आवेले । “दीया” अंजोर के प्रतीक ह आ “बाती” ओह अंजोर के सहारा । जब दीया आ बाती दूनो साथ होखेला, त अन्हार दूर हो जाला । एही सोच के संगे दीया बाती पत्रिका के शुरुआत कइल गइल बा, ताकि समाज में भोजपुरी भाषा खातिर, जागरूकता आ संस्कार के रोशनी फैलावल जा सके ।
ई पत्रिका खास तौर पर ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, सामाजिक मुद्दा आ समसामयिक विषयन पर केंद्रित बिया । आज के जुग में जब शहरिया चमक - दमक में गाँव के आवाज दब जात बा, दीया बाती पत्रिका गाँव के असली तस्वीर दुनिया के सामने रखे के काम कर रहल बा । किसान के मेहनत, मजदूर के पसीना, नारी के संघर्ष आ युवा लोगन के सपना : सब कुछ ई पत्रिका में साफ - साफ देखे के मिलेला ।
दीया बाती पत्रिका के भाषा सरल, सहज आ दिल से जुड़ल भोजपुरिया ह । ई पत्रिका एह बात पर विश्वास रखेले कि भाषा अगर आपन होखे, त बात सीधा दिल तक पहुँचेला । एह में छपे वाला लेख, कविता, कहानी आ विचार आम आदमी के जिनगी से जुड़ल रहेला । एह से पाठकन के लागेला कि ई पत्रिका हमनी के आपन ह, हमनी के कहानी कह रहल बिया ।
दीया बाती पत्रिका नयका लेखक आ कवियन खातिर एगो मजबूत मंच बा । जे भी लिखे के चाह रखेला, लेकिन मंच ना मिल पावेला, ओह लोगन के आवाज ई पत्रिका बन रहल बिया । गाँव - देहात के छुपल प्रतिभा के सामने लावे में दीया बाती पत्रिका लगातार प्रयासरत बिया ।
आज डिजिटल दौर में दीया बाती पत्रिका ऑनलाइन माध्यम से । पाठकन तक पहुँच रहल बे । एह से भोजपुरिया भाषा आ संस्कृति के दायरा अउरी बढ़ रहल बा । देश - विदेश में रह रहल भोजपुरिया लोगन खातिर ई पत्रिका आपन माटी से जुड़ल रहे के एगो सुंदर जरिया बन गइल बा ।
अंत में, दीया बाती पत्रिका खाली एगो पत्रिका ना, बल्कि एगो आंदोलन ह । भाषा के बचावे के, संस्कृति के सहेजे के आ समाज में उजाला फैलावे के आंदोलन । जब तक दीया बाती जलत रही, तब तक समाज में उम्मीद, सच्चाई आ सकारात्मक सोच के रोशनी फैलत रही ।
ई पत्रिका भोजपुरिया समाज के ह । भोजपुरिया समाज के अंतिम पावदान प खड़ा भोजपुरिया तक एह पत्रिका के पहुंचावल हमनी के जिम्मेदारी बा ।
डॉ राजेन्द्र भारती
सम्पादक
